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Tuesday, February 20, 2018

छात्र-छात्राओं की मूलभूत मांगो को लेकर बीसीएम ने बीएचयू प्रशासन को दिया ज्ञापन और बड़े आंदोलन करने की चेतावनी दी।

भगत सिंह छात्र मोर्चा के नेतृत्व में 40 से 50 छात्र-छात्राओं ने अपनी मूलभूत मांगो को लेकर आज 20 फ़रवरी 2018 को सैकड़ो छात्र-छात्राओं द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन कार्यवाहक कुलपति नीरज त्रिपाठी को सौंपा।






करीब एक घंटे तक छात्र-छात्राओं और प्रशासन में सवाल-जवाब होता रहा। mmv की छात्राओं ने भी अपने मुद्दे को रखा। कुलपति की ओर से तो कोई डेडलाइन नहीं दिया बस सिर्फ आश्वासन दिया गया की मुद्दे जायज है हम इस पर काम करेंगे।



ज्ञापन देने गये छात्र-छात्राओं ने तय किया है की कुछ दिनों में अगर मांगे नहीं मानी गई तो आगे एक बड़ा आन्दोलन करेंगे।मौके पर चीफ प्रॉक्टर रोयाना सिंह, कला संकाय के डीन श्रीनिवास पाण्डेय आदि मौजूद थे।























छात्र-छात्राओं की मूलभूत मांगो को लेकर आज 20 फ़रवरी 2018 को सैकड़ो छात्र-छात्राओं द्वारा हस्थाक्षारित ज्ञापन कार्यवाहक कुलपति को सौपने आप सभी आये।

स्थान- सेंट्रल ऑफिस,बी.एच.यू.।
समय- 1 बजे।

प्रमुख मांगे-
-सभी छात्रावासों के मेस व कैंटीनों का खाने -नास्ते को सस्ता करो।
-गर्ल्स हॉस्टल के मेसों में भी डाइट ऑफ कराने की व्यवस्था करो।
-साइबर लाइब्रेरी में सीटों की संख्या बढाई जाय और उसे 24 घंटे खोला जाय।
-सेंट्रल लाइब्रेरी में जरुरी व उपयोगी क़िताबे जल्द से जल्द मंगाई जाय।
-शोध छात्र-छात्राओं की चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता लायी जाय और साक्षात्कार के अंक कम किये जाय।
-GSCASH का गठन जल्द से जल्द किया जाय।

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भगत सिंह छात्र मोर्चा!













बीएचयू छात्राओं व आईआईटी बीएचयू की भोजन से संबंधित मांगे तत्काल मानी जाए -भगत सिंह छात्र मोर्चा (बीसीएम)

  

  बीएचयू छात्राओं के ऐतिहासिक आंदोलन के पश्चात एक अंतराल के बाद एक बार फिर अपने अधिकारों को लेकर आवाजें उठने लगी है।  

  गत 12 फरवरी को महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने अपने परिसर के गेट पर धरना दिया। ये तब हुआ जब महीनों बिना खाना खाएं भी उनसे धन उगाही किया जाने लगा। और मेस  शुल्क में भी वृद्धि कर दिया गया। इसके विरोध के अलावा उनकी मुख्य मांग है कि मेस शुल्क प्रति मील/डाइट लिया जाए। मांसाहारी भोजन उचित मूल्य में उपलब्ध हो। और खाने की गुणवत्ता में सुधार किया जाए। 5 घंटे आंदोलन चलने के बाद भी प्रशासन का वही पुराना अहंकारी व पितृसत्तात्मक रवैया ही सामने आया। मांगो को लिखित मानने के बजाय मौखिक रूप से उल्टे छात्राओं को ही फसा दिया गया। बोला गया कि खुद ही मेस चलाने की जिम्मेदारी लो और फिर बताओ। 






सवाल ये है कि क्या लडकिया इतना संघर्ष करके एक सरकारी विश्वविद्यालय में आती है मेस चलाने के लिए? और प्रशासन का अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ना कितना जायज है? ये अलग बात है कि छात्राएं विश्वविद्यालय भी चला सकती है और छात्र मेस। बस आप छात्रसंघ और मेस में स्थायी नौकरी की भर्ती बहाल करें। अखबार में आंदोलन की खबर को इस रूप में पेश किया जा रहा है कि "छात्राओं ने मेस महाराज पर लगाया आरोप और प्रशासन के कहने पर मानी"। बीएचयू प्रशासन आवाज दबाने के लिए मीडिया पर लाखो खर्च करता है। इसका भी पर्दाफास करना जरूरी है। मेस महाराज का घाटा होगा कह कर मुद्दा भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। इस साजिश को भी समझने और पर्दाफास करने की जरूरत है।  अमीर नेताओ के कैंटीन में खाना सस्ता और गरीब छात्रों को महंगा क्यो?  




ये समस्याएं लगभग अन्य छात्र-छात्राओं व आईआईटी के छात्रावासों की भी है। आईआईटी बीएचयू में भी छात्रों ने प्रचार व हस्ताक्षर अभियान चलाकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। प्रशासन का चरित्र छात्र विरोधी,अलोकतांत्रिक,महिलाविरोधी व गरीबविरोधी है। इसलिए वह लड़कियों के खाने में भेदभाव कर रहा है। सब्सिडीयुक्त सरकारी मेस की स्थायी भर्ती निकालने के बजाए ठेके पर चलाया जा रहा है। मेस शुल्क में बृद्धि की जा रही है। 



  अतः भगत सिंह छात्र मोर्चा  इन मांगों को बुनियादी मानता है। और इसके लिए कैम्पस में चल रहे आंदोलनों का समर्थन करता है। आज जब छात्रों का भविष्य सबसे अंधकार में है तब ऐसे संघर्षों से ही रास्ते और मंजिल भी तय होंगे। बीसीएम सभी छात्रों से अपील करता है कि इन मांगों व अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो,एकजुट होकर लंबा आंदोलन चलाये।
#मेस शुल्क वृद्धि वापस लो और सस्ता करो!
#छात्राओं व छात्रों को मांसाहारी भोजन उपलब्ध करो!
#प्रति मील/डाइट शुल्क भुगतान लिया जाए!!
#भोजन की गुणवत्ता बढ़ाई जाए!!
#विश्वविद्यालय को बेचना बंद करो और परिसर में लोकतंत्र बहाल करो!!
#छात्र एकता जिंदाबाद!!!