Wednesday, April 22, 2015

कनहर बांधव वहां धरना दे रहें लोगों पर लाठी-गोली चलाने के विरोध में जुलूस एवं सभा :

        बीसीएम ,sc-st छात्र कमेटी व रेहड़ी -पटरी संगठन ने संयुक्त रूप से कनहर बांध व वहां धरना दे रहें लोगों पर लाठी-गोली चलाने के विरोध में जुलूस निकाला। जुलूस मुख्य द्वार बीएचयू से निकलकर रविदास गेट होते हुए पुनः वापस मुख्य द्वार पर आकर  में बदल गया।  जुलूस में ढेर सारे छात्र-नागरिक शामिल  थे। 


 हत्यारी कनहर बांध परियोजना को रद्द करो !,जनांदोलनों  दमन बंद करो !,मजदूरो-किसानो पर गोली चलाना बंद करो !,जल-जंगल-जमीन  के लिए संघर्ष कर रहे दलित-आदिवासियों को लाल सलाम ! भूमि अधिग्रहण अध्यादेश रद्द करो ! जमीन हमारी आपकी नही किसी के बाप की ! आदि नारे लगाये गए। 
     
 सभा में चिंतामणि ,संदीप ,शुधा,विनोद व शैलेश ने अपनी बात रखी। विकास के माडल पर साथी युद्धेष के गीत से कार्यक्रम का समापन हुआ।  

कनहर बांध का विरोध कर रही जनता पर पुलिस द्वारा गोलीबारी, लाठीचार्ज व गिरफ़्तारी करने के विरोध में जुलूस एवं सभा :
स्थान : मुख्य द्वार बीएचयू,लंका,वाराणसी |
दिनांक : २० अप्रैल २०१५
समय : शाम ५ बजे |
घटना की डिटेल में जानकारी निचे दिए गए लिंक में है |
http://www.jantakiawaz.in/?p=4697

Monday, April 13, 2015

'हिंदू राज को रोकना होगा'- बाबासाहेब आंबेडकर

हाशिया से ...

Posted by Reyaz-ul-haque


आरएसएस, भाजपा और भारतीय राज्य एक बार फिर बाबासाहेब आंबेडकर को अपनी राजनीति को जायज ठहराने के लिए उनको 'अपनाने' की कोशिश कर रहा है. उन्हें एक 'हिंदू राष्ट्रवादी' बताना इसी साजिश का हिस्सा है. लेकिन जातियों के उन्मूलन और ब्राह्मणवाद के ध्वंस के लिए लड़ने वाले  बाबासाहेब का जीवन, चिंतन, उनके संघर्ष और उनका लेखन उन सभी चीजों के खिलाफ खड़ा है, जिनका प्रतिनिधित्व संघ, भाजपा या भारतीय राज्य करते हैं. मिसाल के लिए देखिए कि उन्होंने हिंदू राज के बारे में क्या कहा था. उनकी किताब पाकिस्तान ऑर द पार्टीशन ऑफ इंडिया से. बाबासाहेब की जयंती पर उन्हें याद करते हुए.


''अगर हिंदू राज असलियत बन जाता है, तो इसमें संदेह नहीं कि यह इस देश के लिए सबसे बड़ी तबाही होगी. हिंदू चाहे जो कहें, हिंदू धर्म स्वतंत्रता, बराबरी और भाईचारे के लिए खतरा है. इस लिहाज से यह लोकतंत्र के साथ नहीं चल सकता. हिंदू राज को किसी भी कीमत पर रोकना होगा.''- डॉ. बी.आर. आंबेडकर


Sunday, April 12, 2015

वीसी द्वारा अनुसूचित जाति-जनजाति छात्र कार्यक्रम आयोजन समिति का कार्यक्रम रोकने का विरोध करे !


साथियों , 

              सूचना मिली है कि अनुसूचित जाति-जनजाति छात्र कार्यक्रम आयोजन समिति,बीएचयू द्वारा अम्बेडकर जयंती पर एक शोभ यात्रा निकालने की तैयारी थी जिसे प्रशासन ने अनुमति दी थी  और अब जब सारी तैयारी हो गयी बड़े पैमाने पर पोस्टर लगाये गए प्रचार किया गया तब वीसी व प्रशासन इस कार्यक्रम पर रोक लगा रहा है | 
        यह तर्क दे रहा कि कैंपस में अभी माहौल ठीक नहीं है | जबकि उस मामले का इससे कोई लेना-देना नहीं है और यह कार्यक्रम भी दूसरी जगह पर है | जब छात्रों में एक समझदारी बन गयी है कि मारपीट कि छोटी सी घटना का प्रशासन लाभ उठा रहा है और उसे तूल देकर छात्रों कि अन्य गतिविधियों को रोकना चाहता है | तब वीसी मैनेज्ड मिडिया में यह बयान दे रहा है कि वह शांति चाहता है और कैम्पस से जल्द से जल्द पीएसी हटाई जाएगी |  इस कार्यक्रम को रोकना भी उसी रणनीति का हिस्सा है | 

         वहीँ पर सोसल साईंस फैकल्टी में १५ को व १४ को स्वतंत्रता भवन में यूनेस्को शांति पीठ,स्वदेसी जागरण मंच (आरएसएस ) द्वारा गोष्ठी कि जा रही है | यह घटना बीएचयू व वीसी के ब्राम्हणवादी चरित्र को उजागर करता है | और यह अम्बेडकर के इस विचार के खिलाफ है कि " हमारे मुख्य दुश्मन ब्राम्हणवाद और पूंजीवाद है "| इस लिए भगत सिंह छात्र मोर्चा इस घटना कि निंदा करता है और विरोध करेगा | तथा सभी छात्रों से अपील करता है कि इसका विरोध करे ! और इस यात्रा को सफल बनाये !

नोट - सभी को सूचित किया जाता है कि आज शाम को ४ बजे मेन  गेट बीएचयू,लंका पर विरोध प्रदर्शन है |

Friday, April 10, 2015

बांटो और राज करो का पर्दाफास करो !

कैम्पस में शांति बहाल करो !  प्रशासन कि राजनीति का पर्दाफास करो !                 



साथियो,
       काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक मालवीय को एक तरफ भारत रत्न दिया जा रहा है तो वहीँ दूसरी तरफ विश्वविद्यालय के छात्रों पर पीएसी द्वारा लाठिया चलवाई जा रही है | उन्हें हास्टल से बाहर कर दिया जा रहा है जबकि  छात्रों की परीक्षाएं आ गयी है | इस तरह की घटनाएं बीएचयू के इतिहास में एकदम नई है |और यह एकदम शर्मसार कर देने वाली घटना है | दो -तीन वर्षों से जब से छात्रसंघ की मांग तेज हुयी तभी से बिरला बनाम ब्रोचा ,आर्ट्स बनाम साईंस या बीएचयू बनाम आईआईटी जैसे बांटों और राज करो के मामले को तूल दिया जा रहा है |
      यह पूरी तरह से प्रशासन प्रायोजित और लम्पट-गुंडों को सह देकर किया जा रहा है | इसमें आरएसएस के लोग भी शामिल है जिनकी गतिविधियों में इन सब घटनाओ से कोई प्रभाव नहीं पड़ता बल्कि डेमोक्रेटिक माहौल होने से प्रभाव पड़ता है | अन्य इस तरह की पिछली घटनाओ में हम देख सकते है कि कोई छोटी आपसी झगड़े कि घटना होती है तो प्रशासन उसको तत्काल रोकने कि वजाय मूक दर्शक बना रहता है | आखिर क्या कारण है कि इनके सामने ही लम्पटो द्वारा गली-गलौज और मारपीट कि जाती है पर ये कुछ नहीं करते ?  जब सारा मामला शांत हो  जाता है तब कैंपस में पीएसी बुलाई जाती है छात्रों कि बुरी तरह पिटाई कि जाती है और सारा का सारा हास्टल खली करा दिया जाता है | कैम्पस को पूरी तरह से पुलिस के हवाले कर दिया जाता है | पुरे कैम्पस में खुलेआम गस्त करते है और दहशत का माहौल बनाते है | 

       जब विश्वविद्यालय प्रशासन फेल है तो क्या फर्क पड़ता है कि कैम्पस को पुलिस राज चलाये | आखिर वे कौन लोग सक्रिय है जो इन सब छोटी-मोटी घटनाओं को बढ़ा रहें है ? इस तथाकथित अराजकता का तर्क देकर प्रशासन द्वारा कैम्पस में तानाशाही स्थापित करता जा रहा है | केंद्रीय विश्वविद्यालय के परिसर का माहौल लोकतंत्र व ज्ञान के केंद्र के रूप में होना चाहिए पर यहाँ शाम होते ही गांव कि तरह अँधेरी रात में तब्दील हो जा रहा है | ९-१० बजे तक सेन्ट्रल व साइबर लायब्रेरी,सभी गेटो को बंद कर दिया जा रहा है |

इस घटना के मद्देनज़र भगत सिंह छात्र मोर्चा यह मांग करता है कि 
  • प्रशासन कि विफलता को ध्यान में रखते हुए वीसी व प्रॉक्टर को बर्खास्त किया जाये | 
  • कैम्पस से पीएसी को तत्काल बाहर किया जाये और कैम्पस में प्रवेश वर्जित किया जाये | 
  • सभी छात्रों को तत्काल हॉस्टल सुविधा बहाल किया जाये | 
  • कैम्पस में लोकतंत्र बहाल किया जाये |   
इन मांगों को लेकर राष्ट्रपति को भी एक पत्र फैक्स किया गया है |


इस घटना को लेकर बीसीएम ने एक प्रेस वार्ता आयोजित किया और प्रेस विज्ञप्ति जारी किया |

Monday, April 6, 2015

स्मार्ट सिटी के नाम पर बनारस को उजाड़ा जा रहा है ।


 बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के बगल में भगवानपुर,छित्तूपुर सीरगोवर्धनपुर और डाफी में स्मार्ट सिटी के तहत सड़क चौड़ा करने के नाम पर उन लोगो का घर उजाड़ा जा रहा है ।  जिन्होंने अपनी जमीने देकर बीएचयू  को  बनाया है । और वे आज सपरिवार रात-रात भर बैठ कर रो रहे है । पचास- हजार रुपये का ठेका देकर खुद अपना घर तुड़वा रहें हैं और तोड़ रहें हैं । वहाँ के लोगों का कहना है कि "हमने ही इस मोदी सरकार को चुना था लेकिन वही  सरकार आज विकास के नाम पर उनका घर उजाड़ रही है ।  गंगा को साफ करते करते हम लोग का घर ही साफ कर दे रहें है । और कोई भी नेता इस बात पर नहीं बोल रहा है ।" वे भी  इस देश के नागरिक उन्हें रहने जीने का अधिकार है । कोर्ट का भी आदेश है कि दुकानों व घरों को बिना पुनर्स्थापित किये उसे उजाड़ नहीं सकते । ऐसे में हम छात्रों खास तौर पर बीएचयू के छात्रों का दायित्व बनता है की उनके दुखो को समझें और उनके लिए सरकार से उचित मुआवजे की मांग करें । 

उनके बीच एक सर्वे करने के बाद बांटा  गया यह परचा :

           भगवानपुर,छित्तूपुर और सीरगोवर्धनपुर की जनता से अपील !

साथियों,
      नयी सरकार आने के बाद सौ स्मार्ट सिटी बनाने की योजना आई है। उन सौ सिटी में से एक अपना बनारस भी है। जिसे जापान के सहयोग से क्योटो की तरह सिटी बनाया जायेगा और वहाँ सड़कों को चौड़ा करने के नाम पर इसका काम भी शुरु हो चूका है। इसी के अंतर्गत लंका से डाफी तक सड़क को ३०,४० या ६० फीट चौड़ा करने की बात की जा रही है । जो अभी स्पष्ट नहीं है। फिर भी सरकार द्वारा बिना किसी नोटिस दिए यह धमकी दिया गया है कि लोग अपनी जमीन खाली कर दे नहीं तो वे खुद खाली करा देगी । जिससे डर कर प्रभावित लोग खुद ही अपना घर और दुकान तोड़ने लगे । और इस तथाकथित स्मार्ट सिटी बनाने कि कीमत चुकाने के लिए मजबूर है। अभी तो यह शुरुआत है आगे हजारो लोगों को इसकी कीमत चुकानी है। क्योकि बनारस को अब आम नहीं खास लोगों का शहर बनाया जा रहा है। यह खास लोग है बहुराष्ट्रीय कम्पनिया इसके दलाल पूंजीपति और भू माफियाँ  जिनके लिए बनारस के आस-पास के २०० गांव को उजाड़ने की योजना है। ताकि बहुराष्ट्रीय  कंपनियों,शॉपिंग मॉल,मल्टिनेशनल दुकाने और फैक्ट्री लगा सके।

साथियो इसी क्रम में भगवानपुर,छित्तूपुर और सीरगोवर्धनपुर में सड़क के किनारे रहने वाले परिवारों को विस्थापित किया जा रहा है। इन परिवारों की जीविका का मुख्य साधन उनकी दुकान है। जो सड़क के किनारे स्थित है इसी से वे अपने परिवार का पेट भरते है । और यहाँ कई पीढियों से रहते आ रहे है। पर सरकार ने इनके जीविका पर लात मारते हुए बिना कोई नोटिस दिए और बिना पूछे सड़क चौड़ा करने के नाम पर जमीन खाली करने की धमकी दिया है। और सरकार का कहना है कि उन्होंने अतिक्रमण करके सरकारी जमीन पर अपना घर और दुकान बनाया है । इसीलिए उन्हें मुवावजा नहीं दिया जायेगा। लेकिन यहाँ रहने वाले लोगों और दुकानदारों का कहना है कि सरकार झूठ बोल रही है। ये जमीन आबादी की है और वे कई पीढियों से यहाँ रहते आ रहे है। इसलिए जमीन उनकी है और उन्हें मुआवजा मिलना चाहिये  क्योंकि भगवानपुर,छित्तूपुर और सीरगोवर्धनपुर गाँव है। और हर गाँव की सड़क इतनी ही चौड़ी होती है।  सरकार झूठा प्रचार करके मुफ्त में ही हमारी जमीन व जीविका छिनना चाहती है। यहाँ कुछ मकान तो सौ साल पुराना है इन्हें अंग्रेजों ने भी नहीं तोडा उसे "अच्छे दिन आने वाले है " का वादा करने वाली सरकार तोड़ रही है। फर्क बस इतना है कि अब गोरे अंग्रेजो कि जगह काले अंग्रेज शासक हो गए है। और कोई भी कमिसनखोर चुनावबाज पार्टियाँ भी हमारा दुःख पूछने नहीं आ रही है। कैसी विडम्बना है कि जिस काशी हिन्दू विश्वविद्यालय को बनाने के लिये  यहाँ के लोगों  ने अपना खेत-खलिहान, गाँव को इसके संस्थापक महामना मदन मोहन मालवीय को दान में दे दिया है और बचऊ यादव ने कुर्बानी तक भी दी। उनको विश्वविद्यालय के एक सौ वर्ष पुरे होने पर भारत रत्न दिया जा रहा है वहीं दान देने वाले लोगों को एक बार फिर बिना मुआवजा दिए ही विकास के नाम पर उजाड़ा जा रहा है ।

साथियों ,
         इस दुःख की घड़ी में हम आपके साथ है। आप सभी ग्राम वासियों और विस्थापित हो रहे लोगों से यह निवेदन करते है कि इस उजाड़ने वाले स्मार्ट सिटी का विरोध करें ! संगठित होकर अपने मुआवजा और जीविका के साधन कि व्यवस्था करने के लिए आवाज उठाओ !
                                                                 इंकलाब जिन्दाबाद !     
क्रन्तिकारी अभिवादन सहित - 

भगत सिंह छात्र मोर्चा ( बीसीएम )-8181025014  गणेश (सीरगेट) 7398350499 कान्ता पाल ( छित्तूपुर )- 9795414784

Friday, April 3, 2015

हेम मिश्रा-जीएन साईबाबा समेत सभी राजनितिक बंदियों को रिहा करो !

पुलिस द्वारा प्रताड़ित किये जाने पर जेल से हेम मिश्रा, जीएन साईबाबा व मारोती कुर्वात्कार का संयुक्त रूप से प्रेस विज्ञप्ति  …





Prss note
Police beat on prisoners on prison premises
The case of political prisoner JNU student Hem Mishra
The Nagpur police abused and beat up Hem Keshavdutt Mishra, student of Delhi’s Jawaharlal Nehru University and Political Prisoner presently lodged in Nagpur Central Prison over the issue of applying handcuffs. They attacked him cruelly and injured him. This illegal and inhuman act of the police occurred just outside the prison gate within the prison premises on 20-03-2015 at around 10-00 a.m. when Hem Mishra was being taken for medical treatment to the Government Medical Hospital.
The Supreme Court has long ago ordered that handcuffs should not be applied and ropes should not be tied to prisoners being taken from prison to court or hospital. This provision has also been incorporated in the Criminal Manual and the Jail Manual. Besides, the Assistant Inspector General of Police (Law and Order), Office of the Director General of Police has also issued a circular in this regard. As per this, the police have been given clear orders not to apply handcuffs or tie ropes to prisoners being taken from the prison to the court or hospital. In case, in an exceptional circumstance, there is a need to apply handcuffs or tie ropes then it is necessary to take the permission of the concerned court.
But the Maharashtra police are openly violating the orders of the Supreme Court. On 20-03-2015, when undertrial prisoner Hem Mishra was being taken to the Government Medical Hospital for medical treatment he informed the police of these orders of the Supreme Court. But the police without bothering tried to forcibly apply handcuffs. When he again tried to explain to them, the police abused him and beat him up. Further, they cruelly attacked him and injured him.
They tore his clothes and also threatened to “see” him. These acts of the police are unconstitutional and illegal. They are also a violation of the orders of the Supreme Court. The victim has therefore sent a complaint to the Dhantoli Police Station through the Prison Superintendent calling for registration of an offence against the concerned guilty persons in this case and for their arrest. A complaint regarding this incident has also been made to the concerned court, the Principal Judge, Gadchiroli Sessions Court. Hem Mishra, G.N. Saibaba, Maroti Kurvatkar, have vide Press Release demanded that strict action should be taken against the guilty in this case.
Date: 22-03-2015
Yours faithfully,
1) Hem Mishra -sd-
2) Maroti Kurvatkar -sd-
3) G. N. Saibaba -sd-


Thursday, April 2, 2015

शहीदों की याद में …!

    (23 मार्च)  भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरु व क्रन्तिकारी कवि अवतार सिंह "पाश" की शहादत दिवस की पूर्व शंध्या पर २२ मार्च २०१५ को भगत सिंह छात्र मोर्च (बीसीएम) ने मशाल जुलूस निकाला | और मशाल सांस्कृतिक मंच की तरफ से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया | 

    मशाल जुलूस मुख्य द्वार बीएचयू से निकाला गया और यह रविदास गेट होते हुए अस्सी घाट तक गया | जुलूस अस्सी घाट पर पहुंच कर सभा में बदल गया | जुलूस में सैकड़ों छात्र-छात्राएं,नौजवान व बुद्धिजीवी शामिल हुए | जुलूस के दौरान लोगों ने जोशो-खरोश के साथ जमकर नारे लगाये | 

       जिसमें मुख्य रूप से शहीद भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरु अमर रहें !,क्रन्तिकारी कवि अवतार सिंह "पाश" अमर रहें !,वीर शहीदों का पैगाम-जारी रखना है संग्राम !,हर जोर जुल्म के टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है !,क्रन्तिकारी शहीदों को लाल सलाम!,काले अंग्रेजों होश में आओ!,विदेशी कंपनियों को मार भगाओ!,साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!,इंकलाब ज़िंदाबाद! आदि नारे लगाये गए | बीच-बीच में लोग मेरा रंग दे बसंती चोला जैसे गानों के साथ सडकों पर नाचते-झूमते भी चले जा रहे थे | और मशालों की रोशनी से पूरी सड़क जगमगा रही थी | जुलूस का नेतृत्व आरती , विनोद ,मनीष ,सिद्धांत ने किया | 

    सभा में संदीप पाण्डेय व चौधरी राजेंद्र ने अपनी बात रखी | इसके बाद मशाल सांस्कृतिक मंच (एमएसएम) ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में कुछ क्रांतिकारी गीतों की प्रस्तुति दी | जिसमें आरती ने सूली चढ़ कर वीर भगत ने दुनियां को ललकारा है नींद से जागो ऐ मजदूरो सारा देश तुम्हारा है,हेमंत ने ऐ भगत सिंह तू ज़िंदा है हर एक लहू के कतरे में, स्वाती-धीरज ने मेरा रंग दे बसंती चोला, शैलेश ने भारत अपनी महान भूमि और युद्धेष ने सरफ़रोशी की तमन्ना व अपने लिए जिए तो क्या जिए तू जी ऐ दिल ज़माने के लिए गाया | इसका सञ्चालन हेमंत ने किया |