Tuesday, November 21, 2017

एक और सब्बीरपुर जो सब्बीरपुर नहीं बन सका।

बलिया(उ.प्र.) के श्रीनगर गाँव में दलितों पर हुए हमले की तथ्यान्वेषी रिपोर्ट
यह रिपोर्ट ग्राम विकास मंच से विनोद मित्रा और मनोज, जाति उन्मूलन मोर्चा (CAF) से हेमंत कुमार और जनमुक्ति मोर्चा से राजेश द्वारा 16-17 नवम्बर 2017 को किये गए श्रीनगर गाँव के दौरे के आधार पर बनाई गयी है|
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   बलिया (उ.प्र.) से लगभग 35 कि.मी. की दूरी पर बैरिया थाना क्षेत्र में श्रीनगर गाँव है| श्रीनगर गाँव में दलित बस्ती के पास एक छोटा सा अदभुत बाबा का मंदिर है, मंदिर के बगल में एक पुराने बंद पड़े स्कूल का कमरा है| जांच टीम पहले दलित बस्ती में गयी, जहाँ के फूलनाथ ने बताया कि इस कमरे की छत पर 9 नवम्बर 2017 को दोपहर 2 बजे पांच दलित लड़के फूलनाथ उम्र 27 वर्ष, सूरी उम्र 19 वर्ष, लालबाबू उम्र 21 वर्ष, राहुल उम्र 17 वर्ष और शैलेन्द्र उम्र 21 वर्ष मौजूद थे| इसी समय तीन राजपूत लड़के रवि सिंह उम्र 25 वर्ष, सोनू सिंह उम्र 22 वर्ष और विशाल सिंह उम्र 24 वर्ष आये और दलितों को बोले कि उस जगह से चले जाएँ| दलित लड़के कुछ देर बैठे रहे| फिर रवि सिंह ने गाली गलौच करते हुए कहा कि “भोसड़ी के चमार, यह मंदिर तुम्हारे बाप का नहीं है, चले जाओ यहाँ से”| दलित लड़के मंदिर की छत से नीचे उतर गए| रवि सिंह और उनके दोस्तों ने कमरे की छत पर कुछ देर गांजा पीने के बाद नीचे उतर कर कहा कि “तुम सब को आज हम उठवा लेंगे, जाकर अपनी माँ की साड़ी में छुप जाओ”| फिर वे चले गए| दलित लड़कों ने इसे सामान्य तौर पर लिया और किसी को कुछ बताया नहीं|
      जांच टीम से दलित बस्ती के लोगों से बातचीत के दौरान बस्ती के कई लोग मौजूद थे| वहां बसपा के स्थानीय नेता लल्लन राम ने बताया की एक घंटे बाद गाँव की पश्चिम दिशा से 25-30 की संख्या में राजपूत आये| इनके सिर पर भगवा गमछे बंधे थे| राजपूत तलवार, गुप्ती, रिवाल्वर, छूड़ा, डंडे, हॉकी जैसे हथियार लिए हुए थे| वे अदभूत बाबा के मंदिर पर आये, और वहाँ पूजा किया| माथे और तलवारों पर टीका किया, जय दुर्गा और जय श्री राम के नारे लगाये| भद्दी और जातिसूचक गाली गलौच करते हुए दलित बस्ती पर हमला कर दिया| इस समय बस्ती के ज्यादातर लोग मजदूरी करने गए हुए थे| जो लोग मिले उन्हें मारा पीटा गया|
   फूलनाथ ने बताया कि सबसे पहले लालबाबू पर लाठी और हॉकी से हमला किया गया है| फिर लल्लन राम जो बसपा के स्थानीय नेता है बातचीत के उद्देश्य उनकी तरफ गए| लल्लन राम के सिर पर तलवार से हमला किया गया, गिर जाने पर डंडे, हॉकी से मारा गया, जिससे पेट आर गहरी चोट लगी और दोनों हाथ टूट गए| फिर हमलावर रेलवे लाइन के पास गए, जहाँ से पत्थर बाजी करने लगे| लल्लन राम को उठाने आये लोगो को पत्थरों से चोट लगी|
फूलनाथ ने बताया कि गाँव के पूरब में लक्ष्मण मठ पर करीब 100 की संख्या में चार उच्च जातियां भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत और गोस्वामी का एक दूसरा गुट जमा था, जिसने दलित बस्ती पर दूसरी तरफ से हमला किया| दलितों को घर में घुस कर मारा पीटा गया| कुछ झोपडिया उजाड़ी गयी और आग लगाने का प्रयास किया गया| आग को सवर्णों द्वारा खुद ही बुझा दिया गया| झगडा समाप्त होने पर रवि सिंह, विशाल सिंह और अन्य यह धमकी देकर गए कि “दो लोग अभी बाकी हैं, हम दोबारा आयेंगे”| यह सब होने के एक घंटे बाद पुलिस और विधायक सुरेन्द्र सिंह गाँव में आये|
FIR और पुलिस का रवैय्या: 9 नवम्बर की शाम को ही SC/ST अट्रोसिटी  एक्ट के तहत 19 लोगों पर मुक़दमा दर्ज किया गया| दलितों का आरोप है कि FIR कमजोर बनाया गया है| इसमें हमलों के दौरान तलवार और बंदूकों के इस्तेमाल को शामिल नहीं किया गया है| पुलिस द्वारा बताई गयी कहानी मानने के लिए मजबूर किया गया है| FIR को देखकर जांच टीम ने यह पाया कि हमले को पैर पर बताया गया है और तलवार से हमले का जिक्र नहीं किया गया है| धारा 307 और 308 लगाये जाने के बजाये मुकदमे में कमजोर धाराएँ जैसे 147, 148, 149, 452, 323, 504   लगायी गयी हैं|
SC/ST अट्रोसिटी एक्ट लगने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारियां नहीं हुईं है| एक व्यक्ति रवि सिंह ने खुद गिरफ़्तारी दी है| लल्लन राम का कहना है कि भाजपा सांसद भरत सिंह और भाजपा विधायक सुरेन्द्र सिंह ने थाने में दबिश बनायीं है कि कोई गिरफ़्तारी नहीं होनी चाहिए| इसीलिए गिरफ्तारियां नहीं हो रही है| 
मेडिकल रिपोर्ट: नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रेवती में हमले के दिन एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं था| लल्लन राम का आरोप है कि उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया था| BSP नेता ओमकार चौधरी के आने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सोनबरसा में मेडिकल जांच हुई| गंभीर रूप से घायल लल्लन राम को जिला अस्पताल भेजा गया|
17 नवम्बर को जांच टीम वर्मा बस्ती में गयी जहाँ किसी ने बात नहीं की| सवर्ण जातियों से तनावपूर्ण और खौफजदा माहौल होने की वजह से बातचीत नहीं हो पाई| पुलिस से भी जांच टीम बात नहीं कर पाई| लेकिन पुलिस द्वारा लिखित FIR गाँव के लोगों द्वारा जांच टीम ने प्राप्त किया|



चोटों का विवरण: 
इस जातीय हिंसा में कुल 13 लोगों को छोटी बड़ी चोटें आई है| पीड़ितों द्वारा बताया गया विवरण इस प्रकार है-
लल्लन राम- लल्लन राम सिर पर चोट है, तलवार से हमला किया गया है| दोनों हाथ टूटे हैं| पेट में गहरी चोटे हैं| पैर में कटने के निशान है|
लालबाबू- हॉकी और डंडे से मारा गया, तलवार से हमला किया गया| 
गीता देवी – तीन बार तलवार से हमला किया गया, पत्थर से चोट लगी है|
फूलनाथ- लाठी और डंडे से मारा गया|
अस्पति देवी- पेट और कमर पर पत्थर से चोट|
कलावती देवी- पत्थर से चोट|
बैजनाथ- पत्थर से चोट|
लगनी देवी- पत्थर से चोट|
कंचन देवी- पत्थर से चोट|
लक्ष्मण राम- छाती पर चोट, धक्का देकर गिराया गया|
विद्यावती देवी- पैर पर पत्थर से चोट|
रूदल राम- कमर पर चोट|
अशोक राम- हॉकी और पत्थर से पेट और पैर में चोट|

निष्कर्ष-
सहारनपुर, खगडिया और देश के अन्य हिस्सों में हो रहे दलित उत्पीडन की ही कड़ी में ही, दलितों पर हुए इस हमले को देखा जाना चाहिए| यह हमला सिर्फ इसीलिए हुआ कि वे दलित हैं, और सवर्ण जाति के लोग ग्रामीण इलाकों में अपना वर्चस्व बनाये रखना चाहते हैं| 
पुलिस का देर से आना, FIR को कमजोर किया जाना, मेडिकल जांच सही ढंग से ना होना, मीडिया द्वारा आधी अधूरी खबरें देना और FIR के बाद भी पुलिस द्वारा कोई भी कार्यवाही नहीं किया जाना यह दर्शाता है की इस घटना में दलितों के साथ सम्पूर्ण राज्यतंत्र ने शत्रु जैसा व्यव्हार किया है|
दलित उत्पीडन की अन्य सभी घटनाओं की तरह बलिया की यह घटना भी बताती है कि सवर्ण जातियां हथियार बंद हैं और मनुवादी हिंदु फासीवाद का उभार इसको और भी हिंसक बना रहा है|
गाँव में अभी भी खौफ का माहौल है और दोबारा ऐसा हमला होने की आशंका बनी हुई है|
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Friday, November 17, 2017

बिरसा मुंडा से लेकर साईं बाबा तक



भगत सिंह छात्र मोर्चा  ने बिरसा मुंडा के 142 वे जयंती पर एक परिचर्चा का आयोजन किया।जिसका विषय- संसाधनों की लूट और इसके खिलाफ आन्दोलन(बिरसा मुंडा से लेकर साईं बाबा तक) था।
बी.एच.यू के मधुबन में यह परिचर्चा 15 नवंबर 2017 को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चली।
जिसमे वि.वि. के लगभग 20 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। गाँव छोड़व नहीं,जंगल छोड़व नहीं गीत भी गाये गये।

परिचर्चा में उपस्थित bcm के सचिव विनोद शंकर ने बिरसा की एक संक्षिप्त जीवनी बताई और आज जल-जंगल-जमीन के चल रही व्यापक आन्दोलन को ही बिरसा मुंडा के आन्दोलन का उन्नत रूप बताया। जिसे आज भारतीय सरकार नक्सल आन्दोलन कह कर आदिवासियों का दमन कर रही है।
आगे दुसरे साथियों में इसी में जोड़ते हुए कहाँ की
आदिवासियों का यह आन्दोलन सिर्फ उनके जीने-मरने का आन्दोलन नहीं बल्की पूरी मानवता को बचाने का आन्दोलन है।
जिस तरह अंग्रेजो के द्वारा बिरसा मुंडा को जेल के अंदर जान से मार कर उनके आन्दोलन को खत्म करने की कोशिश की गई थी उसी तरह जी.एन. साईं बाबा के साथ किया जा रहा है।
मालूम हो की साईं बाबा 90% विकलांक है,जिसे कोर्ट द्वारा आजीवन कारावास दिया गया है। ये बिलकुल गैर-मानवीय व्यवहार है। साथ ही साथ सभी ने एक समझदारी बनायीं की साईं बाबा को जल्द से जल्द रिहा करना चाहिए।
संसाधनों की लूट के लिए मध्य भारत में  ये सरकार सेना और हथियार के दम पर आसिवासियो की हत्या,बलात्कार,मार-पिट कर रही है।
ताकि वो डर जाय और उनके लिए रास्ता साफ़ कर दे।
इसी के खिलाफ लाखों- लाख आदिवासी एक जुट होकर इसके खिलाफ लड़ भी रहे है।
कुल मिलाकर आज मध्य भारत में भारतीय अर्ध-सैनिक बलों और आदिवासियों के बीच एक भीषण युद्ध चल रहा जिसे ये सरकार लड़ तो रही है पर आम जनता को बताने से बच रही है।
जिन सैनिको को देश की सीमा पर होना चाहिए उन्हें बड़े-बड़े पूंजीपतियों के लिए प्लांट और कच्चा-माल उपलब्ध कराने के लिए आदिवासियों के खिलाफ खड़ा कर दिया गया है।
आज हम सभी यूनिवर्सिटी में पढने वाले विद्यार्थियों-नौजवानों को सरकार के इस कदम का विरोध कर वहां से सैनिक हटाने और आदिवासियों के ऊपर ढाहे जारे जुर्म को जल्द से जल्द समाप्त करने की की मांग की जानी चाहिए।

क्योंकि जब जंगल-नदी-पहाड़ बचेगें तब ही पूरी मानवता बचेगी।आज हम आये दिन प्रदुषण की समस्या और इस से होने वाले मौत के बारे सुनते रहते है।
इसलिए बिरसा मुंडा की लड़ाई और आज मध्य भारत में आदिवासियों की दोनों लड़ाई एक ही है।जबकी आज की लड़ाई पहले के अपेक्षा और उन्नत-बड़ी लड़ाई है क्योकी आज उनके पास समजावाद और साम्यवाद नामक वैज्ञानिक-दर्शन है। जो पूरी मानवता की मुक्ति का दर्शन है।

लड़ो पढाई करने को- पढो समाज बदलने को!
हुल जोहर!   
इन्कलाब जिंदाबाद!   
जल जंगल जमीन की लड़ाई जिंदाबाद!

Saturday, October 28, 2017

दलित पैंथर का घोषणापत्र










  

साईबाबा ने जेल से लिखा पत्नी को पत्र, कहा मैं यहां जिंदगी की आखिरी सांसें ले रहा हूं

शोषित - दलित के पक्ष में खड़ा होना ही इस जनविरोधी, फासीवाद के पोषक सत्ता को सबसे बड़ा जुर्म नजर आता है। शोषितों के हक में आवाज बुलंद करनेवाले प्रोफेसर साई के साथ ( जो कि शारिरिक रूप से 90% अक्षम हैं ) जेल मे जानवरो सा बर्ताव किया जा रहा है।
स्वास्थ्य बिगड़ने के बाबजूद कोई सेवा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। बुखार होने और ठंड से कांपने के बावजूद न तो उन्हें एक कंबल उपलब्ध कराया जा रहा है न ही पहनने के लिए ही कोई गर्म कपड़ा ।इनका स्वास्थ्य बदतर होता जा रहा है ।यह सब इन्होने जेल से अपनी जीवनसाथी को लिखे पत्र में बताया है। आमजन के साथ खड़े होने वाले प्रोफेसर साईं के लिए आज सभी बुद्धिजीवियों और जनवादियों को आवाज उठाने की जरूरत है।
                       -जनज्वार से हिंदी में

प्रिय वसंता
मुझे दस्तक दे रही सर्दियों के बारे में सोचकर ही डर लग रहा है। पहले से ही मुझे लगातार बुखार बना हुआ, परेशान हूं मैं बुखार से। मेरे पास सर्दी से बचाव के लिए एक कंबल तक नहीं है। न ही मेरे पास स्वेटर या जैकेट पहनने के लिए है, जिससे कि मैं ठंड से अपना बचाव कर सकूं। जैसे—जैसे ठंड दस्तक दे रही है मेरे पैरों में और बाएं हाथ में लगातार दर्द बढ़ता जा रहा है।

नवंबर से शुरू होने वाली सर्दी के दौरान मेरे लिए यहां सर्वाइव करना लगभग असंभव जैसा है। मैं यहां उस की तरह जी रहा हूं, जो अपनी अंतिम सांसों के लिए संघर्ष कर रहा हो। मैंने यहां किसी तरह ये 8 महीने बिताए हैं। लेकिन मुझे नहीं लगता कि ठंड में मैं यहां जीवित रह पाउंगा। इस बात का मुझे पूरा यकीन है। मुझे नहीं लगता कि मुझे और ज्यादा अपने स्वास्थ्य के बारे में लिखने की जरूरत है।  
कृृपया किसी भी तरह इस महीने के आखिर तक या इससे पहले किसी वरिष्ठ वकील को मेरे केस को देखने के लिए फाइनल करो। मिस्टर गाडलिंग को मेरी जमानत अर्जी नवंबर के पहले हफ्ते या अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में ही तैयार करने को कहो। तुम्हें पता है कि अगर मेरी जमानत नहीं हुई तो मेरी स्वास्थ्य की स्थिति आउट आॅफ कंट्रोल हो जाएगी। इसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं होउंगा। अब मैं इस बारे में आगे से तुम्हें कुछ और नहीं कहूंगा।
तुम्हें मेरी स्थिति के बारे में रेबेका जी और नंदिता नारायण से बात करनी चाहिए। इस बारे में प्रोफेसर हरगोपाल और अन्य लोगों से भी बात करो। उन्हें पूरी स्थिति समझाओ। प्लीज जल्दी कुछ करो। मैं बहुत डिप्रेस्ड हूं। इस निराशा में मुझे लगता है कि मेरी हालत एक ऐसे भिखारी की तरह हो गई है जो बिल्कुल बेसहारा है। लेकिन आप में से कोई भी एक इंच नहीं चल रहा है, कोई भी मेरी स्थिति को समझ नहीं पा रहा है।
मुझे लगता है कि कोई भी मेरी स्थिति नहीं समझ पा रहा है। नहीं समझ पा रहा है कि एक 90 प्रतिशत विकलांग व्यक्ति कैसे इस स्थिति में एक हाथ से संघर्ष कर रहा है, जो कई बीमारियों से पीड़ित है। कोई भी मेरी ज़िंदगी की परवाह नहीं करता है। यह सिर्फ एक आपराधिक लापरवाही है, एक कठोर रवैया है।
तुम अपना भी ध्यान रखो। तुम्हारा स्वास्थ्य मेरा और पूरे परिवार का स्वास्थ्य है। इस वक्त तुम्हारे अलावा कोई दूसरा तुम्हारा ख्याल रखने वाला नहीं है।
जब तक मैं नहीं हूं, तब तक तुम्हें बिना किसी लापरवाही के अपनी खुद ही देखभाल करनी होगी।      

 बहुत सारा प्यार 
तुम्हारा 

साई